उत्तराखंड

Uttarakhand: कांग्रेस में चुनाव से पहले गुटबाजी, अब तक नहीं हो पाई को-ऑर्डिनेशन कमेटी की मीटिंग

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उत्तराखंड कांग्रेस में पार्टी की तरफ से चेहरे की बात पर इंदिरा ह्रदयेश और हरीश रावत आमने सामने हैं.

उत्तराखंड कांग्रेस में पार्टी की तरफ से चेहरे की बात पर इंदिरा ह्रदयेश और हरीश रावत आमने सामने हैं.

Uttarakhand Congress rift: उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने पर हैं. चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी में गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही. कांग्रेस की को-ऑर्डिनेशन कमेटी बने 14 दिन हो गए, लेकिन कमेटी के 9 मेंबर्स ने अब तक एक मीटिंग नहीं कर पाए हैं.

देहरादून. उत्तराखंड कांग्रेस में को-ऑर्डिनेशन कमेटी भले ही बन गई हो, लेकिन ना तो अब तक कोई मीटिंग हुई है और न कोई को-ऑर्डिनेशन दिख रहा है. चुनाव से पहले को-ऑर्डिनेशन की कहानी बिगड़ती दिख रही है. मीटिंग को लेकर प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव का कहना है कि मीटिंग जल्द होगी.

कांग्रेस की को-ऑर्डिनेशन कमेटी बने 14 दिन हो गए, लेकिन कमेटी के 9 मेंबर्स ने अब तक एक मीटिंग नहीं कर पाए. गुरुवार को प्रभारी और को-ऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव देहरादून में थे, सोशल मीडिया का प्रोग्राम लॉन्च हुआ. देहरादून में होते हुए हरीश रावत ऑफिस तक नहीं आए. ऐसे में सवाल है
कि को-ऑर्डिनेशन कमेटी की मीटिंग कब होगी और क्या को-ऑर्डिनेशन सुधरेगा. मीटिंग को लेकर प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव का कहना है कि कमेटी की मीटिंग जल्द होगी.

पूर्व हरीश रावत का कहना है कि वो को-ऑर्डिनेशन की बात पर कुछ कहना नहीं चाहते लेकिन जब भी प्रभारी मीटिंग के लिए बुलाएंगे, वो ज़रूर जाएंगे. कांग्रेस का समन्वय 2017 से ही गड़बड़ाया हुआ है. मुश्किल बड़े नेताओं के बीच है. नेता विपक्ष इंदिरा ह्रदयेश का कहना है कि सबकी नीयत सही होनी चाहिए, तभी सरकार बनने पर सबको प्रसाद मिलेगा. पार्टी और नेताओं में सद्भाव से काम चलता है, मैं से नहीं, बल्कि हम से काम चलता है.

सीएम चेहरे पर चल रहा विवाद

उत्तराखंड कांग्रेस में चर्चा और तैयारी चुनाव की हो रही है, लेकिन पार्टी की तरफ से चेहरे की बात पर इंदिरा ह्रदयेश और हरीश रावत आमने सामने हैं. हरीश रावत का कहना है कि पार्टी को 2022 चुनाव के लिए चेहरा घोषित करना चाहिए, ताकि कांग्रेस के लिए काम आसान हो सके. रावत का कहना है कि चेहरा घोषित होने से बीजेपी को भी राज्य में सीएम के चेहरे के साथ चुनाव लड़ना पड़ेगा, पीएम मोदी के नाम पर नहीं.

वहीं इंदिरा ह्रदयेश का कहना है कि चेहरा घोषित करने की कोई परंपरा नहीं रही है, और अब तक कांग्रेस ने कोई चेहरा घोषित नहीं किया. इसलिए जरूरी है कि पहली सामुहिक नेतृत्व में पार्टी चुनाव जीते और फिर नेता तय कर लिया जाएगा और फिर तय कर लिया जाएगा कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा.






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