उत्तराखंड

देहरादून में 2200 पेड़ों को कटने से बचाने के लिए शुरू हुआ चिपको आंदोलन, पेड़ों से चिपक मौली बांध लिया बचाने का संकल्प

देहरादून। देहरादून से मसूरी के बीच आवागमन को सुगम करने के लिए जोगीवाला से कुल्हान तक करीब 14 किलोमीटर लंबे डबल लेन मार्ग का चौड़ीकरण कर उसे फोर लेन किया जाना है। इसके लिए मसूरी और देहरादून वन प्रभाग में करीब 2200 पेड़ कटान के लिए चिह्नित किए गए हैं। हालांकि, इस दिशा में कार्य शुरू होने से पहले ही विभिन्न संगठनों ने पेड़ कटान का विरोध शुरू कर दिया है। इसी के तहत रविवार को सिटिजन फार क्लीन एंड ग्रीन दून के नेतृत्व में कई संगठनों ने चिपको आंदोलन शुरू करते हुए पेड़ों से चिपक कर प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में पेड़ों को नहीं कटने दिया जाएगा। रविवार को सहस्रधारा रोड स्थित खलंगा मेमोरियल के पास विभिन्न संगठन सुबह 11 बजे एकत्र हुए। यहां चिपको आंदोलन की तर्ज पर बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पेड़ों से चिपक कर प्रदर्शन किया। साथ ही सिस्टम के खिलाफ नारेबाजी की। पेड़ों पर मौली बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया गया। इस दौरान सिटिजन फार क्लीन एंड ग्रीन दून की सदस्य जया सिंह ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दून घाटी को विकास के नाम पर बलि चढ़ाया जा रहा है। पहले भी हरे-भरे दून में तमाम पेड़ों को काटकर कंक्रीट के जंगल बसाए गए और अब 2200 पेड़ों पर आरियां चलाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह संगठन हुए आंदोलन में शामिल

डीएनए, डू नो ट्रैश, द अर्थ एंड क्लाइमेट इनिशिएटिव, द इको ग्रुप देहरादून, आगाज, बीन देयर दून दैट, द फ्रेंड आफ दून सोसाइटी, फ्राईडे फार फ्यूचर, आइडियल फाउंडेशन, खुशी की उड़ान चैरिटेबल ट्रस्ट, मैड बाए बीटीडी, मिट्टी फाउंडेशन, निरोगी भारत मिशन ट्रस्ट, पहाड़ परिवर्तन समिति, पराशक्ति, प्रमुख, राजपुर कम्युनिटी, तितली ट्रस्ट, समरहिल इंटरनेशनल स्कूल आदि।

पेड़ कटान का मैड ने भी किया विरोध

2200 पेड़ों के प्रस्तावित कटान का मेकिंग ए डिफरेंस बाय बीईंग द डिफरेंस (मैड) संस्था ने भी विरोध किया है। संस्था का कहना है कि पेड़ों को काटने के बजाय सड़क के किनारे हो रहे अतिक्रमण पर रोक लगाई जाए।

यह है योजना

यह डबल लेन मार्ग देहरादून के जोगीवाला से ङ्क्षरग रोड, लाडपुर होते हुए कुल्हान में मसूरी रोड पर मिलता है। चौड़ीकरण की योजना के तहत इस मार्ग को फोर लेन में विकसित किया जाना है। इस रूट पर नीलगिरी, आम और पीपल के हजारों पेड़ हैैं। इन पेड़ों में से कुछ चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं, जिन्हें काटने की योजना बनाई गई है। इस परियोजना का उद्देश्य दिल्ली समेत अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों को देहरादून शहर में प्रवेश किए बिना सीधे मसूरी भेजना है। जिससे शहर को जाम से निजात मिल सके। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक, इस परियोजना को केंद्र से मंजूरी मिल गई है और इसके लिए केंद्रीय सड़क कोष से कुल 77 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्वीकृत हो गई है।

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