उत्तराखंड

Haridwar Kumbh: गले में पहनते हैं 20 किलो वजनी 11 हजार रुद्राक्ष, नाम पड़ गया रुद्राक्ष बाबा

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हरियाणा से आए रुद्राक्ष बाबा का असली नाम अजय गिरी है,

हरियाणा से आए रुद्राक्ष बाबा का असली नाम अजय गिरी है,

Haridwar Kumbh 2021: रुद्राक्ष बाबा, निरंजनी अखाड़े के नागा बाबा हैं. हरियाणा से आए रुद्राक्ष बाबा का असली नाम अजय गिरी है, लेकिन 11 हजार रुद्राक्ष धारण करने वाले अजय गिरी को लोग रुद्राक्ष बाबा के नाम से जानने लगे हैं.

पुलकित शुक्ला.

हरिद्वार. हरिद्वार महाकुंभ में इन दिनों संतों का रेला उमड़ा हुआ है, दूरदराज से अनोखे और खास साधु महात्मा हरिद्वार पहुंचकर कुंभ मेले में नए-नए रंग भर रहे हैं. आज ऐसे ही एक खास बाबा रुद्राक्ष बाबा के बारे में बता रहे हैं. रुद्राक्ष बाबा 11 हजार रुद्राक्षों को धारण किए रहते हैं. इतनी बड़ी संख्या में रुद्राक्ष धारण करने वाले साधु को देखकर हर कोई उनके पास आशीर्वाद लेने चला आता है. खास बात ये है कि रुद्राक्ष की इन मालाओं का वजन करीब 20 किलो है लेकिन रुद्राक्ष बाबा इसे शिव का अंश समझते हैं और इसे धारण करने में उन्हें कोई भी कठिनाई नहीं होती.

हरिद्वार के कुंभ मेला क्षेत्र में इन दिनों जगह-जगह पर साधु महात्माओं की छावनियां बनी हुई हैं. देशभर से पहुंचे साधु-महात्मा कुंभ नगरी हरिद्वार में अपना डेरा डाले हुए हैं. कोई अपनी खास साधना तो कोई अपनी कद काठी के कारण लोगों में चर्चाओं का विषय बना हुआ है. ऐसे ही निरंजनी अखाड़े के नागा बाबा हैं रुद्राक्ष बाबा. हरियाणा से आए रुद्राक्ष बाबा का असली नाम अजय गिरी है, लेकिन 11 हजार रुद्राक्ष धारण करने वाले अजय गिरी को लोग रुद्राक्ष बाबा के नाम से जानने लगे हैं. रुद्राक्ष बाबा कहते हैं कि ये रुद्राक्ष उनके लिए साक्षात भगवान शिव का ही स्वरूप है. इन 11 हज़ार रुद्राक्ष को धारण करके वे कई कुंभ मेलों में शामिल हो चुके हैं. रुद्राक्ष को धारण करके जब वे धूनी पर बैठते हैं तो उन्हें अलग ही आनंद की अनुभूति होती है.

103 मालाएं धारण किये हैं दयाल दासमालाओं और मोतियों से कुंभ मेले में रंग भरने वाले रुद्राक्ष बाबा अकेले नहीं है, बैराग संप्रदाय के निर्वाणी अखाड़ा के बाबा दयाल दास भी कुछ ऐसी ही वेशभूषा बनाए रखते हैं. राजस्थान से हरिद्वार कुंभ मेले में पहुंचे बाबा दयालदास 103 माला हमेशा धारण किए रहते हैं. ये मालाएं अलग-अलग मोतियों से बनी हुई हैं. दयाल दास का कहना है कि देश के बड़े संतो महापुरुषों से उन्हें ये मालाएं प्रसाद स्वरूप मिली है जिसे वे एक अनुष्ठान के रूप में चला रहे हैं. ये कुल 108 महापुरुषों से माला प्राप्त होने के बाद एक खास यज्ञ करेंगे. दयालदास कहते हैं कि वे पिछले 36 सालों से इस अनुष्ठान में लगे हैं और कई कुंभ मेलों में शामिल हो चुके हैं. आस्था और संस्कृति का महा आयोजन कुंभ मेला इन दिनों हरिद्वार में जारी है, कुंभ मेले के दौरान गंगा स्नान करने से जहां पापों और कष्टों से मुक्ति मिलती है वहीं देश, विदेशों से आए हुए अनोखे साधु-संतों की रहस्यमयी दुनिया को भी जानने का मौका मिलता है.







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